Posted by: Bagewafa | ડિસેમ્બર 4, 2008

सब हैं ईस धरती के उज्याले… –मुसाफिर पालनपुरी

सब हैं ईस धरती के उज्याले  मुसाफिर पालनपुरी

तुझ को तेरा राम संभाले; बात खतम !

और मुझे रब मेरा पाले; बात खतम !

एक हैं सारे गोरे काले; बात खतम !

सब हैं ईस धरती के उजयाले; बात खतम !

ईससे बढकर और इबादत क्या होगी ?

नफरतकी दिवारको ढाले; बात खतम !

आ बतलाउं राझ तुझे खूशहाली का

दिलवालोंसे रब्त बढा ले; बात खतम’ !

बेखौफी ही बुग्झो बगावत का हल है

हर झालीम से आंख मिला ले; बात खतम !

जो भी तेरा चैन उडाए; दिल तोडे

छोड दे उसको रब के हवाले; बात खतम !

प्यार, वफा से बढकर कोई बात नहीं

दिल में बस ! ये बात बीठा ले; बात खतम !

ईन्सां की दरअस्ल मुसाफिरगंगा है

इस पानी में खूब नहा ले; बात खतम !

 

– –मुसाफिर पालनपुरी

(रब्त=संबंध, बेखौफी=निर्भयता, बुग्झोश=बगावत के वेरभावना, दरअस्ल=हकीकतमां.बात खतमउस्ताद बिस्मिल्लाहखां साहेबका तकिया कलाम थाजो ईस गझल का असल उनवान है.. ये गझल. १७ जुलाई २००७की शामको इंदुचाचाकी  यादमें  मोअक्कीद प्रोग्राममें जनाब मुसाफिर पालनपुरी साहबमे पेश किया था.)

 

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