निकल गये_मोहंमदअली’वफा’
चेहरा छूपाके हमतो शहर से निकल गये
खूने कतील कब तलक खामोश ही रहता.
लावा की तरह फैला शहरकी नब्ज नब्ज में
मरजाता है ईंनसान मगर ये नही मरता.
___मोहंमदअली’वफा’
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निकल गये_मोहंमदअली’वफा’
चेहरा छूपाके हमतो शहर से निकल गये
खूने कतील कब तलक खामोश ही रहता.
लावा की तरह फैला शहरकी नब्ज नब्ज में
मरजाता है ईंनसान मगर ये नही मरता.
___मोहंमदअली’वफा’
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