Posted by: Mohammedali’wafa’मोहम्म्दअली’वफा’મોહમ્મદઅલી’વફા’ مُحمَّد علی،وَفا، | May 10, 2007

निकल गये_मोहंमदअली’वफा’

निकल गये_मोहंमदअली’वफा’


चेहरा छूपाके हमतो शहर से निकल गये
खूने कतील कब तलक खामोश ही रहता.

लावा की तरह फैला शहरकी नब्ज नब्ज में
मरजाता है ईंनसान मगर ये नही मरता.

___मोहंमदअली’वफा’


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