जलने दे मेरे दोस्त_मोहंमदअली’वफा’
चलताहुं में जीस तरह चलने दे मेरे दोस्त
जलताहुं तेरी यादमें जलने दे मेरे दोस्त.
वल्लाह पुछ्ना नही मंझिलका भी पता
मेरे कदमको युंही मचलने दे मेरे दोस्त.
तुलुअ तो होता हुं में मगर मेरी अदासे
तारिक्यां छानेको है ढलने दे मेरे दोस्त.
खुश्क न हो जाये ये तेरे ईश्क की तरह
ये आंखके दरियेको तो बहने दे मेरे दोस्त.
ईसरार से रुकता नहीं खुशियोंका काफला
गमके बादलोंको भी गिरने दे मेरे दोस्त.
शिकवा नहीं ईस लिये बदगुमां है तु
चुपकेसे ये आहें जरा भरने दे मेरे दोस्त.
जीनेके बहाने तो सभी रुस्वा ही हो गये
ईज्जत भरी कोइ मोतसे मरने दे मेरे दोस्त.
_मोहंमदअली’वफा’